बारह मैना (गढ़वाली)

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रचनाकार

-आचार्य नवीन ममगाईँ

रचनाकार

मैना अयूं छौ फुलारी चैत कू
काफल पकिन गढ़वाल म
परदेशी प्रदेशों म अर बेटी सौर्यासों म
बैठ्यां न्यूतों का जग्वाल म।।

मैना पौणे कू वैशाख आयी
मैतोड़ा मैत ऐन ठुमा ठुम
परदेशी नौकर घर बौड़ी ह्वैन
ब्यो पौणे की छै धका धुम।।

जेठ का मैना होन्दी विदाई
रिवाज कल्यो अर पिठैई कू
मैना जू लग्यू जून जुलै कू
रस्याण क्या बुन तब खटैई कू।।

अषाड़ से पैली बणाङ लगीं
सभी डांडा कांठा फुकेगेन
मैना लगी अब स्वाणा अषाड़ कू
रोपणी का दिन भी बौड़ी ऐन।।

मैना लगी अब स्वाणा अषाड़ कू
रोपणी का दिन भी बौड़ी ऐन।।

सौण भादो की रूणझुण बरखा म
लगुला ठागुरों लौफणा छिन
चौंतरफा घनाघोर कुयेड़ी लौंकी
बेटी मैतुड़ा कू खुदेणा छिन।।

असुज का मैना बणचरा गोर
घौर कू अटगदा रमाणी च
कार्तिक ऐग्ये भैला बटैगिन
खुशी की बग्वाल भी आणी च।।

मङशीर का मैना मांग भोरेणी
बेटुली का ब्वै बाबा रोणा छिन
पौण पिठै अर घुण्ड्या रासौं
ब्यो की रस्म निभौणा छिन।।

पुष कू जाडो म पंचमी मौ की
गणेश की देली सज्यां छिन
चौदिशु बर्फ कू भौंरू लग्यूं
डांडी कांठी ढक्यां छिन।।

ग्यारह मैनो की रूद खुद सूणी
अब मी फागुण की सुणोणू छौं
पुंगड़ी पाटुली मी धै लगोणी
मी होल नस्यूड़ा सज्योणू छौं।।

हीरा अर मोती बल्द म्यारा
नौ हाथ की लाट च
कान्धा म हौल हाथ म सेंता
बारह मैना म इनि ठाट च।।

(उत्तराखण्ड, भारत।)

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